Tuesday, 28 February 2023
#story "मदद... #help अरे मोहन भैया ....आइए आइए .... जैसे ही आकाश ने मोहन को देखा तो उसका स्वागत करते हुए बोलाक्या बात है आकाश भाई ...नये कपड़े पहने कहीं जाने की तैयारी कर रहे हो लगता है में गलत समय पर आ गया फिर कभी आऊंगा अरे नहीं ....में तो बस मंदिर जा रहा था वो ...नया टैंडर होनेवाला है तो भगवान से प्रार्थना करने की ये टेंडर मुझे मिल जाएमंदिर ... अरे तो चलो में भी साथ चलता हूं भाई वाह ...एक और एक ग्यारह तो चलो मोहन ने बाइक स्टार्ट की और आकाश पीछे बैठ गया दोनों पास के मंदिर में भगवान जी के दर्शन करने पहुंचे दोनों ने मंदिर में भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया और बाहर निकल आए मोहन जहां बाइक पार्किंग से लेने चला गया तो आकाश वहीं बाहर उसका इंतजार करने लगा तभी ... बाबूजी ... बाबूजी भगवान के नाम पर कुछ दीजिए भगवान आपका भला करेंगे...एक बुजुर्ग आकाश की और आते हुए बोला उसके कपड़े लगभग मैले कुचैले से थे अबे चल... दूर हट...बाबूजी .... भूखा हूं कुछ ...सुना नहीं चल हट ... जाकर कमा कर खाओ ...आ जाते हो मुंह उठाकर बेशर्म कही के मांगने के लिए...ये देखकर मोहन ने बाइक स्टैंड पर खड़ी की और बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा ...आप कुछ खाएंगे भूख लगी है आपको बाबाहां बेटा ....मोहन तुरंत पास की दुकान से पूड़ी सब्जी लेकर आया और बुजुर्ग व्यक्ति को देते हुए बोला ...वो बाबा खा लों ...बुजुर्ग बड़े चाव से खाने लगा तब तक बाइक में रखी पानी की बोतल निकालकर मोहन ने उस बुजुर्ग व्यक्ति को देते हुए कहा ... साफ पानी है बाबा ... पी लीजिएगाये सब देख रहे आकाश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था क्योंकि उसकी तरह मोहन भी भीख देना अच्छा नहीं मानता था मगर आज ...इससे पहले वो मोहन को कुछ कहता मोहन उससे बोला क्या यार आकाश .... देखकर तो बोला कर बुजुर्ग आदमी है पता नहीं किस मजबूरी में...और अगर तुम्हें कुछ भी नहीं देना था तो कोई बात नहीं मगर इतना डांटना तो नहीं था मोहन ...मेरी बात सुन... ये लोग ऐसे मानने वाले नहीं है और तू कबसे इनका हिमायती बनने लगा तू भी भीख देने के खिलाफ रहता है नाहां ...में भी किसी को भीख देने के खिलाफ रहता हूं मगर उन बुजुर्ग व्यक्ति ने पैसे नहीं भूख का हवाला देकर कहा था कि वह भूखे हैं और भूखे को खाना खिलाना भीख नहीं होती में तो तुझे बस ये कह रहा था कि भाई अगर तुम्हें उसे कुछ नहीं भी देना था तो कम से कम प्यार से मना कर देता ....अच्छा .... उससे क्या हो जाता और क्यों मना करता प्यार से वो मुझसे मांग रहा था समझा कोई कर्जा नहीं ले रखा मैंने उससे ये होते ही बेशर्म लोग हैं एकबार दे दो तो मुंह उठाए चले आते हैं मांगने को सही कहा मेरे भाई तुमने ... बेशर्म लोग....अब एकबार यही बात खुदपर भी लागू करते हुए सोचकर देख तो क्या मतलब ...मतलब ये हम भी तो आए दिन भगवान जी से कुछ ना कुछ मांगते रहते हैं अगर भगवान जी ने भी इसी तरह से हमें डांटना शुरू कर दिया कि जा मेहनत कर बेशर्म कही के आ जाता है बार बार मांगने के लिए तो ...तो फिर कैसा रहेगा...अब आकाश शर्मिंदगी से सिर झुकाए खड़ा हुआ थामेरे भाई ....में नहीं कहता कि तुम किसी को भीख दो मगर किसी जरूरतमंद की मदद तो कर सकते हो तो करो ना इसी का नाम तो दुनियादारी है जैसे हमें उम्मीद होती हैं किसी से की वो हमारे लिए ये काम कर दे तो आसानी होगी काम बन जाएगा वैसे ही हम जैसे लोगों से भी कुछ लोग उम्मीद बांधे देखते हैं तो उन जरुरतमंद लोगों की मदद करने में हिचकिचाहट कैसी ....चल अब घर चले कहते हुए मोहन ने बाइक स्टार्ट की और आकाश पीछे मुस्कुरा कर बैठ गयाएक सुंदर रचना...#दीप...🙏🙏🙏
#saas#bahu #rishta. मंजू ने लम्बी साँस लेते हुए मन में सोचा -''आज सासू माँ की तेरहवीं भी निपट गयी .माँ ने तो केवल इक्कीस साल संभाल कर रखा मुझे पर सासू माँ ने अपने मरते दम तक मेरे सम्मान, मेरी गरिमा और सबसेबढ़कर मेरी इस देह की पवित्रता की रक्षा की .ससुराल आते ही जब ससुर जी के पांव छूने को झुकीतब आशीर्वाद देते हुए सिर पर से ससुर जी का हाथपीछे पीठ पर पहुँचते ही सासू माँ ने टोका था उन्हें .......'' बिटिया ही समझो ...बहू नहीं हम बिटियाही लाये हैं जी !''सासू माँ की कड़कती चेतावनी सुनते ही घूंघट में से ही ससुर जी का खिसियायाहुआ चेहरा दिख गया था मुझे . .उस दिन के बाद से जब भी ससुर जी के पांव छुए दूर से ही आशीर्वादमिलता रहा मुझे .पतिदेव के खानदानी बड़े भाई जब किसी काम से आकर कुछ दिन हमारे घर में रहे थे तब एक बेटे की माँबन चुकी थी थी मैं ...पर उस पापी पुरुष की निगाहें मेरी पूरी देह पर ही सरकती रहती .एक दिन सासू माँ ने आखिर चाय का कप पकड़ाते समय मेरी मेरी उँगलियों को छूने का कुप्रयास करते उस पापी को देख ही लिया और आगे बढ़ चाय का कप उससे लेते हुए कहा था ......''लल्ला अब चाय खुद के घर जाकर ही पीना ...मेरी बहू सीता है द्रौपदी नहीं जिसे भाई आपस में बाँट लें .'' सासू माँ की फटकार सुन वो पापी पुरुष बोरिया-बिस्तर बांधकर ऐसा भागा कि ससुर जी की तेरहवी तक में नहीं आया और न अब सासू माँ की .चचेरी ननद का ऑपरेशन हुआ तो तीमारदारी कोउसके ससुराल जाकर रहना पड़ा कुछ दिन ...अच्छी तरह याद है वहाँ सासू माँ के निर्देश कान में गूंजतेरहे -'' ...बचकर रहना बहू ..यूँ तेरा ननदोई संयम वाला है पर है तो मर्द ना ऊपर से उनके अब तक कोई बाल-बच्चा नहीं ...''आखिरी दिनों में जब सासू माँ ने बिस्तर पकड़ लिया था तब एक दिन बोली थी हौले से .......'' बहू जैसे मैंने सहेजा है तुझे तू भी अपनी बहू की छायाबनकर रक्षा करना ..जो मेरी सास मेरी फिकर रखती तो मेरा जेठ मुझे कलंक न लगा पाता .जब मैंने अपनी सास से इस ज्यादती के बारे में कहा था तब वे हाथ जोड़कर बोली थी मेरे आगे कि इज्जत रख लेघर की ..बहू ..चुप रह जा बहू ...तेरी गृहस्थी के साथ साथ जेठ की भी उजड़ जावेगी ..पी जा बहू जहर ....भाई को भाई का दुश्मन न बना ....और मैं पी गयी थी वो जहर ..आज उगला है तेरे सामने बहू !!'' ये कहकर चुप हो गयी थी वे और मैंने उनकी हथेली कसकर पकड़ ली थीमानों वचन दे रही थी उन्हें''चिंता न करो सासू माँ आपके पोते की बहू मेरे संरक्षण में रहेगी .'' सासू माँ तो आज इस दुनिया में न रही पर सोचती हूँ कि शादी से पहले जो सहेलियां रिश्ता पक्का होने पर मुझे चिढ़ायाकरती थी कि -'' जा सासू माँ की सेवा कर ..तेरे पिता जी से ऐसा घर न ढूँढा गया जहाँ सास न हो '' ....उन्हें जाकर बताउंगी कि ''सासू माँ तो मेरी देह के लिबास जैसी थी जिसने मेरी देह को ढ़ककर मुझे शर्मिंदा होने से बचाये रखा न केवल दुनिया के सामने बल्कि मेरी खुद की नज़रों में भी .'
Monday, 27 February 2023
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌟🔱 *सुविचार मंथन*🔱🌟परिवर्तन 🔆 चाहे कैसा भी हो...सरलता से नहीं होता...चाहे आप अपनी उन्नति, प्रगति अथवा अपने अच्छे जीवन, अच्छे भविष्य 🌠 के लिए ही क्यों न कर रहे हों..!! जैसे दिन के पश्चात रात्रि आती है..अंधेरे का आगमन होता है तो उसे समाप्त करने के लिए प्रकाश 💡 की व्यवस्था करनी पड़ती है, फिर सुबह भोर में उसी कृत्रिम प्रकाश को बंद कर दिया जाता है। स्पष्ट संकेत 💫 है कि परिवर्तन यदि हो रहा है या आप परिवर्तन की इच्छा रख रहे हैं तो उसके अनुरूप ही प्रयास ✊🏻 भी आपको करने ही होंगे। परिवर्तन के अनुसार निर्णय लेना कष्टदायी अवश्य हो सकता है, किन्तु बिना किन्हीं ठोस प्रयासों के केवल परिवर्तन की चाह 💗 बनाये रखना कदाचित अधिक कष्ट ही देता है...!! स्मरण रखें, एक सूखा पत्ता भी बिना किसी कारण अपने स्थान से हिलता 🍂 तक नहीं है..यदि हिलता है तो उसका कारण भी पहले ही उत्पन्न होगा..!! *प्रसन्न रहें 😊!! एक बार प्रेम से अवश्य कहें/लिखें, जय जय श्रीराधेकृष्णा, जय जय सियाराम*!!!🙌🏻💐 🕉 *ईश्वर सदैव हमारे संग हैं* 🕉 *"परिस्थितियाँ" हमारे "नियंत्रण" से बाहर हो सकती है लेकिन....हमारा "आचरण" नियंत्रण से बाहर नहीं होना चाहिए।**एक चाहत होती है... अपनों के साथ जीने की, वरना पता तो हमें भी है ...कि मरना अकेले ही है!*”*मित्रता एवं रिश्तेदारी "सम्मान" की नही "भाव" की भूखी होती है...बशर्तें लगाव "दिल" से होना चाहिए "दिमाग" से नही। कहा जाता है की एक "प्रणाम" कई “परिणाम” बदल देता है!**तेरा मेरा करते एक दिन चले जाना है, जो भी कमाया यही रह जाना है ! कर ले कुछ अच्छे कर्म, साथ यही तेरे जाना है !रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते हैं, लेकिन मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते हैं !* *मुझे वो रिश्ते पसंद है, जिनमें " मैं " नहीं " हम " हो !! इंसानियत दिल में होती है, हैसियत में नही, उपरवाला कर्म देखता है, वसीयत नही।**आप कितने भी अच्छे इंसान हो फिर भी आप किसी न किसी के लिए बुरे होगे क्योंकि.….लोग हमेशा अपने हित के अनुसार आपका मूल्यांकन करते है।**विस्तार की इच्छा मनुष्य में जन्मजात गुण धर्म है, कोई भी कमजोर या अविकसित रहने की इच्छा नहीं रखता, "सभी अपने मानसिक क्षैत्र का विस्तार करना चाहते हैं, विस्तार की इस प्यास को बुझाने के लिए व्यक्ति को नियमित रूप से प्रयास करते रहना चाहिए!"* *गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है, क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती।।* *मैं आपके सफल सुखद और स्वास्थ्य से भरपूर मंगल दिवस की कामना करता हूं।💐आपका दिन शुभ हो।🙏💐*
Saturday, 25 February 2023
#patipatni #hindistory Great Lesson for Generations🙏पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहीन समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता।लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही।मुकदमा दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया।पति-पत्नी के हाथ में तलाक के कागज़ों की प्रति थी।दोनों चुप थे, दोनों शांत, दोनों निर्विकार।मुकदमा दो साल तक चला था। अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक ................यह महज़ इत्तेफाक ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही टी-स्टॉल पर बैठे , कोल्ड ड्रिंक्स लिया।यह भी महज़ इत्तेफाक ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे।लकड़ी की बेंच और वो दोनों .''कांग्रेच्यूलेशन .... आप जो चाहते थे वही हुआ ....'' स्त्री ने कहा।''तुम्हें भी बधाई ..... तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की ....'' पुरुष बोला।''तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है????'' स्त्री ने पूछा।''तुम बताओ?''पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया, वो चुपचाप बैठी रही, फिर बोली, ''तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था....अच्छा हुआ.... अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पीछा छूटा।''''वो मेरी गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था'' पुरुष बोला।''मैंने बहुत मानसिक तनाव झेली है'', स्त्री की आवाज़ सपाट थी न दुःख, न गुस्सा।''जानता हूँ पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है... तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, '' पुरुष ने कहा।स्त्री चुप रही, उसने एक बार पुरुष को देखा।कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली और कहा, ''तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।''''गलत कहा था''.... पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली।कुछ देर चुप रही फिर बोली, ''मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं...''प्लास्टिक के कप में चाय आ गई।स्त्री ने चाय उठाई, चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी।स्सी... की आवाज़ निकली।पुरुष के गले में उसी क्षण 'ओह' की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था।''तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?''''ऐसा ही है कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,'' स्त्री ने बात खत्म करनी चाही।''तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।'' पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी।''तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है... फिर अटैक तो नहीं पड़े????'' स्त्री ने पूछा।''अस्थमा।डॉक्टर सूरी ने स्ट्रेन... मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, '' पुरुष ने जानकारी दी।स्त्री ने पुरुष को देखा, देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो।''इनहेलर तो लेते रहते हो न?'' स्त्री ने पुरुष के चेहरे से नज़रें हटाईं और पूछा।''हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, '' पुरुष ने कहा।''तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है, '' स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा।''हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ...'' पुरुष कहते-कहते रुक गया।''कुछ... कुछ तनाव के कारण,'' स्त्री ने बात पूरी की।पुरुष कुछ सोचता रहा, फिर बोला, ''तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।''''हाँ... फिर?'' स्त्री ने पूछा।''वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी??? मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए....'' स्त्री ने स्पष्ट किया।''बिटिया बड़ी होगी... सौ खर्च होते हैं....'' पुरुष ने कहा।''वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,'' स्त्री बोली।''हाँ, ज़रूर दूँगा।''''चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,'' स्त्री ने कहा।उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी।पुरुष उसका चेहरा देखता रहा....कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी।स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ''कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे...एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था... कितना अच्छा है... मैं ही खोट निकालती रही...''पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ''कितना ध्यान रखती थी, स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती, सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था। हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी। कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।''दोनों चुप थे, बेहद चुप।दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश।दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे....''मुझे एक बात कहनी है, '' आवाज़ में झिझक थी।''कहो, '' स्त्री नजल आँखों से उसे देखा।''डरता हूँ,'' पुरुष ने कहा।''डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,'' स्त्री ने कहा।''तुम बहुत याद आती रही,'' पुरुष बोला।''तुम भी,'' स्त्री ने कहा।''मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।''''मैं भी.'' स्त्री ने कहा।दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं।दोनों की आवाज़ जज़्बाती और चेहरे मासूम।''क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?'' पुरुष ने पूछा।''कौन-सा मोड़?''''हम फिर से साथ-साथ रहने लगें... एक साथ... पति-पत्नी बन कर... बहुत अच्छे दोस्त बन कर।''''ये पेपर?'' स्त्री ने पूछा।''फाड़ देते हैं।'' पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के कागजात फाड़ दिए। फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी का था ।।पति पत्नी में प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जरा सी बात पर कोई ऐसा फैसला न लें कि आपको जिंदगी भर अफसोस हो ।।
Friday, 24 February 2023
... ︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵ •❁ मेरी कोई ज़ायदाद नहीं ❁• ︶︸︶︸︶︸︶︸︶︸︶ एक दिन मैं तन्हा बैठा था अपने मकान में, चिड़िया बना रही थी घोंसला रोशनदान में. पल भर में आती .. पल भर में जाती थी वो, छोटे-छोटे तिनके ... चोंच में भर लाती थी वो. बना रही थी वो अपना घर .. एक न्यारा, एक तिनका ही था, उसकी ईंट और गारा. कड़ी मेहनत से घर जब उसका बन गया, आए खुशी के आँसू और सीना तन गया. कुछ दिन बाद मौसम बदला और ... हवा के झोंके आने लगे, नन्हे से प्यारे-प्यारे दो बच्चे, घोंसले में चहचहाने लगे. पाल पोसकर चिड़िया ... कर रही थी बड़ा उन्हे, पंख निकल रहे थे दोनों के ... पैरों पर करती थी खड़ा उन्हे. इच्छुक है हर इंसान ... जमीन आसमान के लिए, कोशिश थी जारी उन दोनों की ... एक ऊँची उड़ान के लिए. देखता था मैं हर रोज उन्हें ... जज्बात मेरे उनसे कुछ जुड़ गए, पंख निकलते ही दोनों बच्चे ... माँ को छोड़ अकेला .. उड़ गए. चिड़िया से पूछा मैंने कि .. तेरे बच्चे तुझे अकेला क्यों छोड़ गए ? तू तो थी माँ उनकी ... फिर ये रिश्ता क्यों तोड़ गए ? इंसान के बच्चे अपने माँ-बाप का ... घर नहीं छोड़ते, जब तक मिले न हिस्सा अपना ... रिश्ता नहीं तोड़ते. चिड़िया बोली ~ परिन्दे और इंसान के बच्चे में ... यही तो फर्क है. आज के इंसान का बच्चा ... मोह-माया के दरिया में गर्क है. इंसान का बच्चा .. पैदा होते ही ... हर चीज पर अपना हक जमाता है. न मिलने पर वो माँ-बाप को ... कोर्ट कचहरी तक ले जाता है. मैंने बच्चों को जन्म दिया, पर ... करता कोई मुझको याद नहीं. मेरे बच्चे .. क्यों रहेंगे साथ मेरे, क्योंकि ... ★ मेरी कोई #जायदाद नहीं. ★
Subscribe to:
Posts (Atom)