Friday, 8 May 2026

हमें रुलाने की ताक़त सिर्फ़ उसी इंसान में होती हैजिससे हम बहुत ग़हरा प्रेम करते हैं कोशिश यह करना कि तुम्हें कोई "रोता" हुआ ना देखे, और ना ही "उदास"... क्यूंकि ये वो पल होते हैं... जिसमें पहले आप सामने वाले की नज़र में "कमज़ोर" बनते हैं और फ़िर "तमाशा"...!!सबसे कठिन जो कार्य है, वो किसी से बिछड़ कर भी “इंतज़ार” को करते रहना है...क्युँकि इंतज़ार केवल समय की प्रतीक्षा नहीं होता...बल्कि ये तो आत्मा का निरंतर मरना है...ये वो अवस्था है जहाँ देह आगे बढ़ती है...पर मन उसी क्षण में ठहरा रह जाता है, जहाँ बिछोह ने साँस रोक ली थी...!!""किसी को भूलने की कोशिश़ में हम उसे सबसे ज़्यादा याद करने लगते है""इंतज़ार में मनुष्य बाहर से स्थिर दिखता है... पर भीतर अनगिनत बार टूटता और जुड़ता है...ये ऐसी पीड़ा है, जहाँ न पूरी तरह रोया जा सकता है, और न पूरी तरह जिया, बिछड़ कर इंतज़ार करना स्वयं से रोज़ हारते हुए भी, उम्मीद को ज़िंदा रखना है...ये स्वीकार करना कि सामने कोई नही फिर भी उसके होने की उपस्थिति से मन खाली नहीं होता...इसलिए इंतज़ार सबसे कठिन होता है...क्युँकि इसमें त्याग भी है, धैर्य भी, और वो मौन भी, जो हर दिन भीतर ही भीतर चीखता रहता है...!!""नाज़ुक लगते थे जो लोग वास्ता पड़ा तो पत्थर निकले""औरत का लड़ना भी मर्द को चुभता है... पर औरत लड़ते हुए भी तुमसे, तुम्हारा Attention ही मांग रही होती है... जब तक लड़ रही होती है...वो सिर्फ़ तुम्हारी है... कोशिश करना, वो ख़ामोश ना हो जाए...!!""का़श तुम समझ पाते मुझे थोड़ा सा""मै तुमसे उम्र भर शिका़यतें करूंगी...छोटी छोटी बातों पर यूं हीं लड़ती रहूंगी...रूठकर तुमसे इंतजार करूंगी, मनाए जाने का, केवल तुमसे ही होगा मेरा लड़ना झगड़ना, तुमसे ही कलह और सुलह है मेरी...मेरे प्रेम की तरह मेरा गुस्सा भी बस तुम तक है...!!पूछो क्यूं...? तो सुनो...मैने तुम्हारे अलावा किसी को भी, अपना इतना क़रीबी..कभी समझा ही नहीं...न प्रेम बांटने लायक़, न क्रोध जताने लायक़, न कोई उम्मीद बांधने लायक़, न शिक़ायत करने लायक़, न किसी से इतना सहज़ हो पाई मै, न किसी से एहसासों का भावनाओं का आदान-प्रदान कर पाई मै...!!किसी को ख़ुद से जोड़ना, मुझे कभी सहज़ लगा ही नहीं, किसी से कुछ कहना तो दूर की बात है, मैने कभी किसी से नाराज़गी भी ज़ाहिर नहीं की, मेरे लिए भावनाएं बहुत मूल्यवान है, जिन्हें मैं हर किसी पर ज़ाया नहीं कर सकती, केवल तुम ही हो, जिससे जीवन भर सब कुछ सहज़ता से, बांट लिया मैने...वो सब भी जो ख़ुद से ही नहीं कह पाई मैं...!!तेरे वजूद से हैं रौनकें सारी तेरे बग़ैर इस दुनियां को हम "वीरान" लिखते हैं