Saturday, 2 November 2019

कलयुग हैं साहब यहाँ ;झूठे को स्वीकार किया जाता हैं. और ;सच्चे का शिकार किया जाता हैं..! * जय श्री राम.*

तू भी आईने की तरह बेवफा निकला.... जो सामने आया उसी का हो गया!!!

तकदीर के लिखे पर कभी शिकवा ना कीजिये जनाब.....!! हम इतने अक्लमंद भी नहीं जो खुदा के इरादे समझ सकें.....!!

उम्मीद ना करो इस दुनिया से .... किसी से हमदर्दी की .. बड़े प्यार से जख्म देते हैं ... शिद्दत से चाहने वाले ..

मुझसे ना हो सकेगी जमाने की बंदगी,,, मक्कार भी नहीं हूँ अदाकार भी नहीं...!!