Sunday, 1 March 2020

जब तक खुद पर ना बीते... लोगों को दूसरे के दु:ख का एहसास ही नहीं होता ।

अगर आप किसी की खुशियाँलिखने वालीपेन्सिल नहीं हो सकते हैं तो एकअच्छा साइरेजर बनिए जो उनका दुःखमिटा सके…

इक पल भी मेरा किरदार ना निभा सकेंगे वो लोग..! जो मिलते है मुझसे तो मशवरे हज़ार देते हैं ..!!

रिश्ते निभाने के भी क्या अंदाज हैं लोगों के....कोई “मोम” की तरह “पिघल” कर निभाता है...तो कोई “आग” की तरह जलकर .।?

जब लोहे की रॉड गरम हो जाती है ,तो आप उसे किसी भी आकार मेंढाल सकते हैं.... कभी भी अपना मिजाज़खराब मत करिए , नहीं तो लोगआपको उसी तरह से ढाल देंगे ,जैसा वे चाहते हैं ।

आज के समय में ज्यादातर लोगसिर्फ इसलिए दुखी और असफल हैं .....कि वह अपनी “अकल” के उपयोग केबजाय दुसरों की “नकल” ज्यादा करते हैं I