Sunday, 3 April 2022

इन दो चीजों की गिनती करना छोड़ दो, खुद के दुःख की और दूसरों के सुख की जिंदगी आसान हो जायेगी।

माफी के हकदार गलती करने वाले होते हैं, चालाकी करने वाले नहीं ।

अहंकार और संस्कार में फर्क है,अहंकार दूसरों को झुकाकर खुश होता है, संस्कार स्वयं झुक कर खुश होता है।

रिश्तों का महत्वघर की नई नवेली इकलौती बहू एक प्राइवेट बैंक में बड़े ओहदे पर थी । उसकी सास तकरीबन एक साल पहले ही गुज़र चुकी थी । घर में बुज़ुर्ग ससुर औऱ उसके पति के अलावे कोई न था । पति का अपना कारोबार था ।पिछले कुछ दिनों से बहू के साथ एक विचित्र बात होती ।बहू जब जल्दी जल्दी घर का काम निपटा कर ऑफिस के लिए निकलती ठीक उसी वक़्त ससुर उसे आवाज़ देते औऱ कहते बहू ,मेरा चश्मा साफ कर मुझें देती जा। लगातार ऑफिस के लिए निकलते समय बहू के साथ यही होता । काम के दबाव औऱ देर होने के कारण क़भी कभी बहू मन ही मन झल्ला जाती लेकिन फ़िरभी अपने ससुर को कुछ बोल नहीं पाती ।जब बहू अपने ससुर के इस आदत से पूरी तरह ऊब गई तो उसने पूरे माजरे को अपने पति के साथ साझा किया ।पति को भी अपने पिता के इस व्यवहार पर बड़ा ताज्जुब हुआ लेकिन उसने अपने पिता से कुछ नहीं कहा। पति ने अपनी पत्नी को सलाह दी कि तुम सुबह उठते के साथ ही पिताजी का चश्मा साफ करके उनके कमरे में रख दिया करो ,फिर ये झमेला समाप्त हो जाएगा ।अगले दिन बहू ने ऐसा ही किया औऱ अपने ससुर के चश्मे को सुबह ही अच्छी तरह साफ करके उनके कमरे में रख आई।लेकिन फ़िरभी उस दिन वही घटना पुनः हुई औऱ ऑफिस के लिए निकलने से ठीक पहले ससुर ने अपनी बहू को बुलाकर उसे चश्मा साफ़ करने के लिए कहा। बहू गुस्से में लाल हो गई लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं था। बहू के लाख उपायों के बावजूद ससुर ने उसे सुबह ऑफिस जाते समय आवाज़ देना नहीं छोड़ा ।धीरे धीरे समय बीतता गया औऱ ऐसे ही कुछ वर्ष निकल गए। अब बहू पहले से कुछ बदल चुकी थी। धीरे धीरे उसने अपने ससुर की बातों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और फ़िर ऐसा भी वक़्त चला आया जब बहू अपने ससुर को बिलकुल अनसुना करने लगी । ससुर के कुछ बोलने पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देती औऱ बिलकुल ख़ामोशी से अपने काम में मस्त रहती। गुज़रते वक़्त के साथ ही एक दिन बेचारे बुज़ुर्ग ससुर भी गुज़र गए।समय का पहिया कहाँ रुकने वाला था,वो घूमता रहा घूमता रहा। छुट्टी का एक दिन था। अचानक बहू के मन में घर की साफ़ सफाई का ख़याल आया। वो अपने घर की सफ़ाई में जुट गई। तभी सफाई के दौरान मृत ससुर की डायरी उसके हाथ लग गई।बहू ने जब अपने ससुर की डायरी को पलटना शुरू किया तो उसके एक पन्ने पर लिखा था-"दिनांक 26.10.2019.... आज के इस भागदौड़ औऱ बेहद तनाव व संघर्ष भरी ज़िंदगी में, घर से निकलते समय, बच्चे अक्सर बड़ों का आशीर्वाद लेना भूल जाते हैं जबकि बुजुर्गों का यही आशीर्वाद मुश्किल समय में उनके लिए ढाल का काम करता है। बस इसीलिए, जब तुम चश्मा साफ कर मुझे देने के लिए झुकती थी तो मैं मन ही मन, अपना हाथ तुम्हारे सिर पर रख देता था क्योंकि मरने से पहले तुम्हारी सास ने मुझें कहा था कि बहू को अपनी बेटी की तरह प्यार से रखना औऱ उसे ये कभी भी मत महसूस होने देना कि वो अपने ससुराल में है औऱ हम उसके माँ बाप नहीं हैं। उसकी छोटी मोटी गलतियों को उसकी नादानी समझकर माफ़ कर देना । वैसे मेरा आशीष सदा तुम्हारे साथ है बेटा!! डायरी पढ़कर बहू फूटफूटकर रोने लगी। आज उसके ससुर को गुजरे ठीक 2 साल से ज़्यादा समय बीत चुके हैं लेकिन फ़िर भी वो रोज़ घर से बाहर निकलते समय अपने ससुर का चश्मा साफ़ कर, उनके टेबल पर रख दिया करती है, उनके अनदेखे हाथ से मिले आशीष की लालसा में।जीवन में हम रिश्तों का महत्व महसूस नहीं करते हैं, चाहे वो किसी से भी हो, कैसे भी हो और जब तक महसूस करते हैं तब तक वह हमसे बहुत दूर जा चुके होते हैं। रिश्तों के महत्व को समझें और उनको सहेज कर रखें।

आज बुरा है तो कल अच्छा आएगा। ये वक्त ही तो है बदल जायेगा।

Friday, 1 April 2022

A Crow and Garuda.. 🦅 Just Drop it....Once a Crow, holding on to a piece of meat was flying to find a place where it could sit and enjoy his food.🦅 However, a flock of Eagles were chasing it. The crow was anxious and was flying higher and higher, yet eagles were after the poor crow. 🦅Just then a "Garuda" saw the plight and pain in the eyes of the crow. Coming closer to the crow, he asked:"What's wrong? You seem to be very "disturbed" and in "stress"?"..🦅The crow cried "Look at these eagles!! They are after me to kill me".🦅Garuda being the bird of wisdom spoke "Oh my friend!! They are not after you to kill you!! They are after that piece of meat that you are holding in your beak". Just drop it and see what will happen.🦅The crow followed the instructions of Garuda and dropped the piece of meat, and there you go, all the eagles flew towards the falling meat.🦅Garuda smiled and said "The Pain is only till you hold on to it" Just Drop" it.🦅The crow just bowed and said "I dropped this piece of meat, now, I can fly even higher.."🦅There is a message for us from this story too:🦅1. People carry the huge burden called "Ego," which creates a false identity about us, that we create for ourselves saying "I need love, I need to be invited, I am so and so.. "etc..." Just Drop ....🙋‍♂️2. People get irritated by "others actions" it can be my friend, My parent, My children, My colleague, My life partner... and I get the fumes of "anger "..."Just Drop....🤷‍♂️3. People compare themselves with others.. in beauty, wealth, life style, marks, talent and appraisals and feel disturbed... We must be grateful with what we have ... comparisons, negative emotions .." Just Drop...🙋‍♂️Just drop the burden....It is this logic, From dust to dust....🤷‍♂️That is why in temples ash or vibuthi is given to constantly remind we are nothing but dust.🤷‍♂️🙋‍♂️