Sunday, 31 May 2020

सब परिंदे उड़ गए हैं,धीरे धीरे छोड़ कर ,बांगबा अब है,तन्हा उम्र के इस मोड़ पर ।।

नमक की तरह हो गयी है ज़िन्दगी......लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं........

“चमत्कार ” तब होने लगते हैं... जब आप अपने “सपनों ” को उतनी ही ऊर्जा देते हैं , जितनी की आप अपने असफ़ल होने के “भय ” को देते हैं ॥;

लोगों ने हमें काम के लिए इस्तेमाल किया .... उनका काम था ... हमारा नाम था।

कुछ भी कर्म करो हमेशा एक बात याद रखो की परमात्मा ऑनलाइन है....!!

“गलती ” और “अहंकार ”दोनों शराब की तरह होते हैं...खुद को छोड़कर दूसरे को ही चढ़ी हुई दिखती है।