Monday, 10 August 2020

“माखन -चोर हैं नन्द -किशोर, बाँधी जिसने हैं प्रीत की डोर, हरे कृष्णा हरे मुरारी, पूजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गायें, सब मिलके जन्माष्टमी मनाएँ।”

इंसान बिना मुहूर्त का पैदा होता है ...और बिना मुहूर्त के मर भी जाता है । फिर सारी जिंदगी शुभ मुहूर्त के पीछे क्यों भागता है ।

नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर, रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है…

नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर, रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है…

अपनी किस्मत को कभी दोष मत दीजियेइंसान के रूप में जन्म मिला है ...ये किस्मत नहीं तो और क्या है.।

मन की सच्चाई और अच्छाई कभी व्यर्थ नहीं जाती ...ये वो पूजा है , जिसकी खोज ईश्वर खुद करते हैं ..।