Thursday, 31 March 2022

अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके,""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो।2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो।3. उनकी राय स्वीकारें।4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों।5. उन्हें सम्मान के साथ देखें।6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें।7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ।8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें।9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें।10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें।11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो।12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें।13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें।14. उनके साथ तमीज़ से बैठें।15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें।16. उनकी बात काटने से बचें।17. उनकी उम्र का सम्मान करें।18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें।19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें।20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें।21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें।22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें।23. उनसे पहले खाने से बचें।24. उन्हें घूरें नहीं।25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें।26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें।27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें।28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें।29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें।30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें.31. कहने से पहले उनके काम करें।32. नियमित रूप से उनके पास जायें।33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें।34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं।35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें।माता – पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा खज़ाना हैं, यह मेसेज हर घर तक पहुंचने मे मदद करे तो बड़ी कृपा होगी मानव जाति का उद्धार संभव हैं, यदि ऊपर लिखी बातों को जीवन में उतार लिया तो। सबसे पहले भगवान, गुरु माता पिता ही हैं, हर धर्म में इस बात का उल्लेख है ...।आप सभी के माता पिता को सादर नमन...🙏🙏🙏 🙏🙏🙏🙏

धीरे धीरे कितने नाजायज़ ख़र्च से जुड़ते गए है हम.● टॉयलेट धोने का हार्पिक अलग,● बाथरूम धोने का अलग.● टॉयलेट की बदबू दूर करने के लिए खुशबू छोड़ने वाली टिकिया भी जरुरी है.● कपड़े हाथ से धो रहे हो तो अलग वाॅशिंग पाउडरऔरमशीन से धो रहे हो तो खास तरह का पाउडर.(नहीं तो तुम्हारी 20000 की मशीन बकेट से ज्यादा कुछ नहीं.)● और हाँ, कॉलर का मैल हटाने का व्हॅनिश तो घर में होगा ही,● हाथ धोने के लिएनहाने वाला साबुन तो दूर की बात,● लिक्विड ही यूज करो,साबुन से कीटाणु 'ट्रांसफर' होते है(ये तो वो ही बात हो गई कि कीड़े मारनेवाली दवा में कीड़े पड़ गए)● बाल धोने के लिए शैम्पू ही पर्याप्त नहीं,● कंडीशनर भी जरुरी है,● फिर बॉडी लोशन,● फेस वाॅश,● डियोड्रेंट,● हेयर जेल,● सनस्क्रीन क्रीम,● स्क्रब,● 'गोरा' बनाने वाली क्रीमलेना अनिवार्य है ही.●और हाँ दूध(जो खुद शक्तिवर्धक है)की शक्ति बढाने के लिए हॉर्लिक्स मिलाना तो भूले नहीं न आप...● मुन्ने का हॉर्लिक्स अलग,● मुन्ने की मम्मी का अलग,● और मुन्ने के पापा का डिफरेंट.● साँस की बदबू दूर करने के लिये ब्रश करना ही पर्याप्त नहीं,माउथ वाश से कुल्ले करना भी जरुरी है....तो श्रीमान जी...10-15 साल पहले जिस घर का खर्च 8 हज़ार में आसानी से चल जाता था,आज उसी का बजट 40 हजार को पार कर गया है !तो उसमें सारा दोष महंगाई का ही नहीं है,कुछ हमारी बदलती सोच भी है !*और दिनरात टीवी पर दिखाये जानवाले विज्ञापनों का परिणाम है !*सोचो..सीमित साधनों के साथ स्वदेशी जीवन शैली अपनायें, देश का पैसा बचाएं । जितना हो सके साधारण जीवन शैली अपनाये ! केवल सरकार को महँगाई के लिये कोसने से कुछ नही होगा । *यह लेख बहुत हद तक सबकी आंखें खोलने वाला कड़वा सच है, बस गहराई से सोचने और समझने की जरूरत है .(साभार)

"#रिश्ते....मम्मी मुझे आपसे बात करनी है आराध्या अपनी मां सुधाजी से फोन पर बोली...हां... हां बोल बेटा ... सुधाजी ने कहामम्मी आपने कहा मेरी शादी करवा दी ये तो ठीक है मगर बाकी सब ...मेरा मतलब देवर ननद सास ससुर सभी मुझे तंग करते है ...वो गीता ( ननद) जब देखो भाभी मुझे आपके जैसे दिखना है लिपस्टिक लगा लूं ...भाभीजी प्लीज मैथ्स मे मेरी मदद करो ना .....और वो देवर (सुमित ) भाभी कालेज का प्रोजेक्ट है बताइए ना कैसे करुं ....भाभीजी एग्जाम मे कैसे क्या पढूं ...उफ्फ परेशान हो गई मै तो ...अब ज्यादा पढी हूं तो क्या उनकी टयुटर बन जाऊं... और मेरे सास ससुर ...बेटा ये बना दो वो बना दो ...मुझे और इनको स्पेस नही देते ...मे कोई नौकरानी हूं क्या ...सुधाजी मुसकुराती बोली -बेटा रिश्ते पानी के जैसे होते है जो रंग डालोगी वैसे बनेंगे .....असल में वो तुमसे स्नेह करते हैं और तुम्हारी काबलियत का सम्मान करते है ...मम्मी आप भी शुरू मत हो जाओ ...कोई उपाय बताओगुस्से मे आराध्या बोली...अच्छा एक काम कर ....कहकर सुधाजी ने कुछ आराध्या को समझाया अगले दिन आराध्या बिस्तर से नही उठी ...पहले सास ससुर आए फिर देवर ननद ...उसने सबसे कहा उसकी तबीयत ठीक नही है ....कुछ ही देर मे ननद और सास रसोई घर मे नाश्ता और लंच बनाने की तैयारियों मे लग गई बिस्तर पर ही उसके लिए नाश्ता चाय हाजिर हो गया देवर उसके सिर पर बाम लगा रहा था वही ससुर ने अपने फैमिली डाक्टर को बुलवाकर आराध्या का चेकअप करवाया और बढिया से बढिया दवाई लिखने को कहा ...साथ ही इतनी देर मे देवर फल फ्रूट और जूस लेकर हाजिर हो गया ....सबकुछ आराध्या भीगी आँखों से देख रही थी उसे अपनी सोच पर शर्मिंदगी हो रही थी ... ...सचमुच मां सच कहती है रिश्ते पानी के जैसे होते है प्यार के रंग डालोगे तो प्यार ही प्यार मिलेगा..उसने निर्णय किया अबसे वो अपने इस परिवार मे हमेशा घुलमिल रहेगी...मेरे दोस्तों...पोस्ट का मतलब बस इतना है की छोटी छोटी नौकझोक को बडा ना बनाए उसमें मिठास के जरिये समझदारी दिखाते हुए बनाए रखिए ...अक्सर बेटी को कुछ वक्त लगता है ससुराल मे एडजस्ट होने मे उसे अच्छे से समझाए नाकि अलग होने की बुद्धि दे ...परिवारिक एकता बेहद जरुरी है दोस्तों...

सत्य एक डेबिट कार्ड है, पहले कीमत चुकाएं और बाद में आनंद लें, झूठ एक क्रेडिट कार्ड है, पहले आनंद लें और बाद में कीमत चुकाएं...!

बात करने का मजा उन लोगों के साथ आता हैजिनके साथ बोलने से पहले कुछ सोचना ना पड़े