Saturday, 31 August 2024
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹🌹सुबह की सैर में कभी चक्कर खा जाते है ..सारे मौहल्ले को पता है...पर हमसे छुपाते है दिन प्रतिदिन अपनी खुराक घटाते हैं और🌹तबियत ठीक होने की बात फ़ोन पे बताते है.ढीली हो गए कपड़ों को टाइट करवाते है, देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹किसी के देहांत की खबर सुन कर घबराते है, 🌹और अपने परहेजों की संख्या बढ़ाते है,🌹हमारे मोटापे पे हिदायतों के ढेर लगाते है, "रोज की वर्जिश"के फायदे गिनाते है.🌹‘तंदुरुस्ती हज़ार नियामत "हर दफे बताते है, देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹हर साल बड़े शौक से अपने बैंक जाते है, 🌹अपने जिन्दा होने का सबूत देकर हर्षाते है,जरा सी बढी पेंशन पर फूले नहीं समाते है, और FIXED DEPOSIT रिन्ऊ करते जाते है, 🌹खुद के लिए नहीं हमारे लिए ही बचाते है. देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹चीज़ें रख के अब अक्सर भूल जाते है, 🌹फिर उन्हें ढूँढने में सारा घर सर पे उठाते है, और एक दूसरे को बात बात में हड़काते है,पर एक दूजे से अलग भी नहीं रह पाते है.🌹एक ही किस्से को बार बार दोहराते है,देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹चश्में से भी अब ठीक से नहीं देख पाते है, 🌹बीमारी में दवा लेने में नखरे दिखाते है,एलोपैथी के बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट बताते है,🌹और होमियोपैथी/आयुर्वेदिक की ही रट लगाते है,ज़रूरी ऑपरेशन को भी और आगे टलवाते है.देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹उड़द की दाल अब नहीं पचा पाते है,🌹लौकी तुरई और धुली मूंगदाल ही अधिकतर खाते है, दांतों में अटके खाने को तिली से खुजलाते हैं,🌹पर डेंटिस्ट के पास जाने से कतराते हैं, "काम चल तो रहा है" की ही धुन लगाते है.देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..🌹हर त्यौहार पर हमारे आने की बाट देखते है,🌹अपने पुराने घर को नई दुल्हन सा चमकाते है,हमारी पसंदीदा चीजों के ढेर लगाते है,🌹हर छोटी बड़ी फरमाईश पूरी करने के लिए माँ रसोई और पापा बाजार दौडे चले जाते है,पोते-पोतियों से मिलने को कितने आंसू टपकाते है,देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..🌹बुढापे मे माँ बाप जब बीमार रहते हैं तो एक एक दिनबहुत डरावना लगता हैं🙏 मेरे अनमोल रतनमाँ पापा भगवान् आपको ठीक रखे 🙏🙏देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..🌹
हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे। थक हार कर वापिस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है। 😊1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना।5. जयादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।6. क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना....9. गाँव, जंगल, से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना। इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।आभार स्वदेशी ❤️🙏#जीवनशैली #रसोई #रसोईघर #गांव #ग्रामीण #बर्तन #चूल्हा #दैनिक #दैनिकजीवन
कहानी: जो दिल को छू जाए #गायत्री_निवास : एक बेहद मार्मिक कहानी पढ़िए एक थोड़ी सी पुरानी कहानी , बिलकुल ही एक नये अंदाज में और जानिए कि क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति??? बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आकर शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गयी। सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ कर आयी थी। शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर पर एक पेड़ की ओट में खड़ी एक बुढ़िया पर ठहर गयी। वह सोचने लगी ‘ओह! फिर वही बुढ़िया, आखिर वह क्यों इस तरह से उसके घर की ओर ताकती है?’ शालू की उदासी बेचैनी में तब्दील हो गयी, मन में शंकाएं पनपने लगीं। इससे पहले भी शालू उस बुढ़िया को तीन-चार बार नोटिस कर चुकी थी। शालू को पूना से गुड़गांव शिफ्ट हुए पूरे दो महीने हो गये थे , मगर अभी तक वह यहां ठीक से एडजस्ट नहीं हो पायी थी। पति सुधीर का बड़े ही शॉर्ट नोटिस पर तबादला हुआ था इसलिए वो तो आते ही अपने काम और ऑफ़िशियल टूर में व्यस्त हो गए। उधर बेटी शैली का तो पहली क्लास में आराम से एडमिशन हो गया, मगर सोनू को बड़ी मुश्किल से पांचवीं क्लास के मिड सेशन में एडमिशन मिला। वो दोनों भी धीरे-धीरे रूटीन में आ रहे थे लेकिन शालू ? शालू की स्थिति तो उस पौधे की तरह हो गयी थी जिसे जड़ से उखाड़ कर दूसरी ज़मीन पर रोप दिया गया हो ,जो अभी भी नयी ज़मीन नहीं पकड़ पा रहा था। सब कुछ कितना सुव्यवस्थित चल रहा था पूना में? उसकी अच्छी जॉब थी। घर संभालने के लिए अच्छी मेड थी जिसके भरोसे वह घर और रसोई छोड़कर सुकून से ऑफ़िस चली जाती थी। घर के पास ही बच्चों के लिए एक अच्छा-सा डे केयर भी था। स्कूल के बाद दोनों बच्चे शाम को उसके ऑफ़िस से लौटने तक वहीं रहते थे। लाइफ़ बिल्कुल सेट थी, मगर सुधीर के एक तबादले की वजह से सब गड़बड़ हो गया। यहां न आस-पास कोई अच्छा डे केयर है और न ही कोई भरोसे लायक मेड ही मिल रही है। उसका करियर तो चौपट ही समझो और इतनी टेंशन के बीच ये विचित्र बुढ़िया? कहीं छुपकर घर की टोह तो नहीं ले रही? वैसे भी इस इलाके में चोरी और फिरौती के लिए बच्चों का अपहरण कोई नयी बात नहीं है। सोचते-सोचते शालू परेशान हो उठी। दो दिन बाद सुधीर टू
एक शिक्षक कहा करते थे, आप जीवन में कुछ भी करें, लेकिन आपको खुश करने के लिए किसी और को खोजने की कोशिश न करें। कभी भी किसी पर इस हद तक निर्भर न रहें कि आपकी उम्मीदें पूरी न होने पर आप उदास हो जाएं। विशेषकर मानसिक रूप से. आप परेशान हैं, हेमंत का संगीत सुनें, अपने लिए एक गर्म कप कॉफी बनाएं, दोपहर की मीठी धूप में खुद से बात करें, अपने पसंदीदा लेखक की किताब पढ़ें। अगर आपमें कोई खास रचनात्मकता है तो खुद को उसमें व्यस्त रखें। 🥀 दूसरों पर व्यंग्य करके स्टेटस लिखना, अपने दुख, कमजोरी को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करना किसी बुद्धिमान व्यक्ति का काम नहीं है। अगर आप बहुत परेशान हैं तो कमरे में अंधेरा कर दें और चुपचाप बैठ जाएं। अपने धर्म के अनुसार प्रार्थना करें. यादें ताजा करें, हंसें, रोएं, जो भी हो, अपने साथ एक खूबसूरत रिश्ता बनाएं ताकि दुख के दिनों में आपको कंधे की जरूरत न पड़े। अगर आप किसी चीज में सफल होते हैं तो खुद पर गर्व करें, अगर आप असफल होते हैं तो खुद पर गर्व करें, खुद से एक वादा करें। लेकिन किसी और की नज़रों में अपनी पूर्णता खोजने की कोशिश न करें। आपको कष्ट तब होगा जब दूसरों की नजरें आपके दोषों में आपके गुण नहीं ढूंढ पाएंगी, यदि आप ढूंढ सकते हैं, तो आप ढूंढ सकते हैं। रेस्तरां में अकेले खाना खाना सामान्य होना चाहिए, पार्क में अपने साथ समय बिताना क्यों हास्यास्पद होगा? यदि संभव हो तो वित्तीय लोगों को भी खुद को स्थापित करना चाहिए। ताकि आप गंभीर मूड स्विंग्स में खुद को चॉकलेट दे सकें, आप अपने जन्मदिन पर खुद को एक उपहार दे सकें या वंचित बच्चों के साथ जन्मदिन की खुशी साझा कर सकें, आप अपनी पसंदीदा पोशाक खरीद सकें, भले ही आप अपने लिए पैसे बचा सकें।कभी-कभी अपने आप को कुछ फूल दीजिए। घर के एक कोने में फूल होंगे, मनमोहक खुशबू फैलेगी और आप बेहतर महसूस करेंगे। हर किसी को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी नहीं है, हर किसी को खुश रखना दुनिया में किसी के लिए भी संभव नहीं है। जहां आप नहीं कह सकते, वहां "नहीं" कहना सीखें। मेरे माता-पिता मेरी कद्र नहीं करते, मेरे दोस्त मुझे समय नहीं देते, मेरे करीबी मुझसे ठीक से बात नहीं करते, मेरे लिए उनके पास समय नहीं है, इससे कोई परेशानी नहीं होगी। हमारी भाषा में ध्यान दूसरों के लिए अनावश्यक तनाव मात्र है। दूसरों को परेशान क्यो
Friday, 30 August 2024
मैं पुरुष हूँ।मैं भी घुटता हूँ, पिसता हूँ, टूटता हूँ , बिखरता हूँ,भीतर ही भीतर, रो नही पाता, कह नही पातापत्थर हो चुका, तरस जाता हूँ पिघलने को,क्योंकि मैं पुरुष हूँ।मैं भी सताया जाता हूँ, जला दिया जाता हूँ,उस दहेज की आग में, जो कभी मांगा ही नही था।स्वाह कर दिया जाता हैं मेरे उस मान-सम्मान का,तिनका-तिनका कमाया था जिसे मैंने,मगर आह नही भर सकता,क्योकि मैं पुरुष हूँ।मैं भी देता हूँ आहुति विवाह की अग्नि में अपने रिश्तों की,हमेशा धकेल दिया जाता हूँ रिश्तों का वजन बांध कर,जिम्मेदारियों के उस कुँए में जिसे भरा नही जा सकता मेरे अंत तक कभी।कभी अपना दर्द बता नही सकता,किसी भी तरह जता नही सकता,बहुत मजबूत होने का ठप्पा लगाए जीता हूँ।क्योंकि मैं पुरुष हूँ।हाँ, मेरा भी होता है बलात्कार,उठा दिए जाते है मुझ पर कई हाथ,बिना वजह जाने, बिना बात की तह नापे,लगा दिया जाता है सलाखों के पीछे कई धाराओं में,क्योंकि मैं पुरुष हूँ।सुना है, जब मन भरता है, तब आँखों से बहता है,मर्द होकर रोता है, मर्द को दर्द कब होता है,टूट जाता है तब मन से, आंखों का वो रिश्ता, तब हर कोई कहता है,हर स्त्री स्वेत स्वर्ण नही होती,न ही हर पुरुष स्याह कालिख,मुझे सही गलत कहने वालों,पहले मेरे हालात क्यों नही जांचते?क्योंकि मैं पुरुष हूँ? #man #admi #purash
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