“मैं बच्चों के लिए सह रही हूँ…”ये लाइन बाहर से बहुत strong लगती है…पर अंदर से ये एक टूटी हुई औरत की मजबूरी होती है।तुम दिनभर सब manage करती हो…घर… बच्चे… रिश्ते…और फिर भी रात को यही सोचकर सोती हो ...“शायद कल सब ठीक हो जाएगा…”पर सच क्या है…?कल भी वही होता है…ताने… गुस्सा… disrespect…और आखिर में वही ...“गलती तुम्हारी ही है…”और ये सब सिर्फ तुम तक नहीं रुकता…तुम्हारे बच्चे भी हर दिन ये सब जी रहे होते हैं।वो चुप होते हैं…पर अंधे नहीं होते…वो खेल रहे होते हैं…पर सुन सब रहे होते हैं…वो कुछ पूछते नहीं…पर अंदर ही अंदर सब समझ रहे होते हैं। घर के अंदर क्या बन रहा होता है…एक बच्चा देख रहा है ...माँ हर बार खुद को ही गलत मान लेती हैवो सीख रहा है ...रिश्ते में अपनी इज़्ज़त बचाना जरूरी नहीं…बस किसी तरह निभाना जरूरी है। धीरे-धीरे उनके अंदर क्या बदलता है…कुछ बच्चे बिल्कुल चुप हो जाते हैं…अपनी बात कहना छोड़ देते हैं…हर चीज़ के लिए permission लेने लगते हैं…हमेशा डर में रहते हैं कि कहीं कुछ गलत न हो जाएऔर कुछ बच्चे…उसी behaviour को normal मान लेते हैं…गुस्सा करना… नीचा दिखाना… control करनाउन्हें गलत लगता ही नहीं सबसे खतरनाक सचतुम सोचती हो ..“मैं सह लूँगी… बच्चों के लिए…”पर असल में ....तुम जो सह रही हो… वही उनके अंदर बस रहा है।तुम्हारी चुप्पी…उनकी आदत बन रही हैतुम्हारा दर्द…उनकी सोच बन रहा हैऔर कल…वही उनका रिश्ता बनेगा फिर एक दिन…तुम्हें लगेगा ...“मेरा बच्चा इतना गुस्से वाला क्यों है…”“ये इतना डरता क्यों है…”“ये अपनी बात क्यों नहीं रख पाता…”और जवाब बहुत simple होगा ....क्योंकि उसने घर में यही देखा है। सीधा सच बच्चों के लिए घर बचाना जरूरी नहीं होता…बच्चों के लिए सही माहौल देना जरूरी होता है।उन्हें एक साथ रहने वाले माँ-बाप नहीं चाहिए…उन्हें ऐसा घर चाहिए जहाँ डर न हो। बस खुद से पूछो…?अगर कल तुम्हारी बेटी भीऐसे ही किसी घर में चुपचाप रह जाए…तो क्या तुम उसे बोलोगी — “सह ले”?अगर तुम्हारा बेटा भीकिसी को ऐसे ही रुलाए…तो क्या तुम खुद को माफ़ कर पाओगी?सच-सच बताओ…तुम बच्चों के लिए रुकी हो…या डर के कारण? छोटी-छोटी सच्चाई.....बच्चे समझते नहीं ..... ये झूठ है… वो सब feel करते हैंचुप रहना सही है ...नहीं… इससे गलत और strong होता है“वो बदल जाएगा…” पता नहीं…पर तुम और बच्चे रोज टूट रहे हो ये पक्का हैअगर ये पढ़कर लगा —“ये तो मेरी ही कहानी है…” Comment में “SACH” लिखो या चुप मत रहो… बात करोक्योंकि तुम अकेली नहीं हो…और तुम्हारी चुप्पी…तुम्हारे बच्चों की पूरी जिंदगी बन सकती है।“तुम सह रही हो…और तुम्हारे बच्चे वही जीना सीख रहे हैं…” 💔#SheraKiDidi #AradhanaSharma #RelatableTruth #ToxicGhar #ChildImpact #EmotionalReality #BreakTheCycle #StopAbuse #StrongMaa #RealTalk #NoMoreSilence #InnerHealing #SpeakUpNow