कुछ लोग माफ़ कर देते हैं,कुछ लोग बदला लेते हैं…और कुछ लोग — बस चले जाते हैं।तीसरा रास्ता सबसे कठिन है।न गुस्से का नशा,न माफ़ी का अहंकार—बस एक शांत, दृढ़ फैसला।तुम अब मेरी दुनिया का हिस्सा नहीं हो।हम बचपन से सुनते आए हैं —माफ़ कर दो, बड़े लोग माफ़ करते हैं।मै इतनी बड़ी नहीं हूं।भूल माफ़ होती है, इरादा नहीं।लेकिन बदला जाल की तरह है?मै इस जाल में कभी नहीं फसुगी ।मै तो मुक्त होना चाहूंगी, बंधना नहीं।•मैं तुम्हें माफ़ भी नहीं करूँगी —•मैं तुमसे बदला भी नहीं लूँगी —•मैं तो बस—तुमसे दूर चली जाऊँगी।और यही सबसे बड़ा जवाब है।जो दूर हो जाता है—हारता नहीं।वो कहता है–😶मेरा सुकून तुम्हारी सज़ा से बड़ा है।कुछ रिश्ते टूटते नहीं—बस बंद हो जाते हैं।बिना शोर, बिना ड्रामा। ✍️ unknown sourceस्त्री मन