Sunday, 28 February 2021
******* शार्टकट******short story. ..... एक बार एक चिड़िया जंगल मेँ अपनेँ मीठे सुर मेँ गाना गा रही थी।तभी, उसके पास से एक किसान कीड़ोँ से भरा एक संदूक ले करके गुजरा।चिड़िया नेँ उस किसान को रोक कर पूछा, "भाई तुम्हारे संदूक के अंदर क्या है, और अभी तुम कहाँ जा रहे हो?"किसान नेँ चिड़िया से कहा कि इस संदुक मेँ कीड़े हैँ और वह बाजार से उन कीड़ोँ के बदले पंख खरीदेगा। इतना कहकर किसान बाजार की तरफ बढ़ने लगा!चिड़िया ने किसान का रास्ता रोकते हुए अनुरोध किया कि "पंख तो मेरेपास भी हैँ। मुझे कीड़े तलाशनेँ के लिये बहुत सफर करना पड़ता है, तुम मेरा एक पंख ले लो और बदले मेँ मुझे कीड़े दे दो। इससे मुझे कीड़ोँ की तलाश केलिये बाहर नहीँ जाना पड़ेगा।"किसान ने चिड़िया को कीड़े दे दिए, और चिड़ीया ने बदले मेँ उसे उसका एक पंख तोड़कर दे दिया।उसके बाद रोज यही सिलसिला चलता रहा, और एक दिन ऐसा भी आया, जब चिडीया केपास देने के लिए एक भी पंख नहीँ बचा।वह उड़कर कीड़े तलाशने लायक नहीँ रह गई थी।वह भद्दी दिखनेँ लगी, उसनेँ अब गाना भी छोड़ दिखा। भोजन की तलाश करते-करतेजल्दी ही वह मर गई।दोस्तोँ यही बातेँ हमारी जिँदगी पर भी लागु होती है। कई बार हम ऐसारास्ता चुनते हैँ जो हमेँ शुरूआती दौर मेँ बहुत आसान लगता है पर वहीरास्ता हमेँ आगे चलकर मुश्किल मेँ डाल देता है। चिड़िया को भोजन हासिल करनेँ का तरीका बहुत आसान लगा लेकिन आगे चलकर वही मुश्किल और नुकसानदेह तरीका साबित हुआ।दोस्तोँ Life मेँ ऐसा कोई भी Shortcut नहीँ है जो आपको तुरंत Successful बना दे अच्छा होगा कि आप लालच मेँ न फसेँ और आसान रास्ता रूपी सबसे खतरनाक रास्ते मेँ अपने कदम न बढ़ाये ।शार्ट कट की सफलता विकलांग बना देती है।🌺🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌺
आज जो पीछे मुड़ के देखा तो,कुछ यादें बुला रही थी ;अब तक के सफर की,सारी बातें बता रही थी;कितनी मुश्किल राहें थीं ,हम क्या,क्या कर गए ;एक सुकून की तलाश में,कहाँ ,कहाँ से गुजर गए ;कितने लोग मिले सफर में ,कितने बिछड़ गए ;जन्मों तक साथ निभाने वाले ,जाने वो किधर गए ।अलग ही ज़माना था वो ,अलग ही दौर था ;ज़िन्दगी जीने का ,मक़सद ही कुछ और था ।बचपन की नादानियां थीं ,ख्वाबों भरी जवानियां थीं ;घर की जिम्मेदारियां थीं ;काम धंधे की परेशानियां थीं ;हर उम्र के सपने अलग थे ,खुशियों का दृष्टिकोण अलग था ;गोल अलग था ,मोल अलग था ;आईने में खुद को देखकर ,सोचता रहता हूँ ,क्या खोया,क्या पाया ;अक्सर तौलता रहता हूँ ,कुछ चेहरे,कुछ बातेंकुछ भूली बिसरी यादेंढूंढ रही हैं मुझेक्या सही था,क्या गलत था ।पूछ रही हैं मुझसे ।उम्र के साथ - साथसोच बदलती रहती हैचाहत बदलती रहती हैखोज बदलती रहती हैअब इस मुकाम परएक ठहराव आ गया हैमंज़िल का तो पता नहींपर पड़ाव आ गया है ।बेचैन मन को राहत मिलने लगी है ,समझौता कर लिया तो,ज़िन्दगी मुकम्मल लगने लगी है ।ऐ ईश्वर तेरा शुक्रिया,तुझसे कोई शिकवा,गिला नहीं है ;यहां सब थोड़े अधूरे से है ,किसी को पूरा मिला नहीं है ।बहुत सारी कट गई,अब थोड़ी सी बची है ,किसी के होंठों पे मुस्कराऊँ ,जाने के बाद भी याद आऊँ ,बस यही ज़िन्दगी है ,बस यही ज़िन्दगी है ।~~~~
Saturday, 27 February 2021
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