Tuesday, 31 August 2021

आज की दुनिया में झूठ धीरे से बोलोगे तो भी सब सुन लेंगे, और सच चिल्लाने पर भी कोई नहींसुनता..

जो हद से "बढ़" जाए वो सिर्फ बर्बादी ही लाता है, फिर वो चाहे "भरोसा" हो या "गुरुर" !!

डिप्रेशन क्यो ???श्रीकृष्ण से कितना कुछ छूटा..! पहले माँ छूटी, फिर पिता छूटे..! फिर जो नंद-यशोदा मिले, वे भी छूटे...संगी-साथी छूटे.. राधा भी छूटी... गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी... श्रीकृष्ण से जीवन भर, कुछ न कुछ छूटता ही रहा.! नहीं छूटा तो देवत्व, मुस्कान और सकारात्मकता...। श्रीकृष्ण दुःख नहीं, उत्सव के प्रतीक हैं... सब कुछ छूटने पर भी, कैसे खुश रहा जा सकता यह श्री कृष्ण से अच्छा कोई नहीं सीखा सकता ! इसलिए हमेशा खुश रहें, सदा मुस्कुराते रहे...

*औरत के साथ और बाद का जीवन* एक औरत की कमी तब अखरती हैजब वो चली जाती है, और वापस लौट कर नहीं आतीछत पर लगे जाले व आँगन की धूलहटाने में संकोच आता है।" तुम्हारी ये सफाई " कहने का मौकानहीं मिल पाता !!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब कालरों की मैल छुटाने मेंपसीना छूट जाता हैचूडियां साथ में नहीं खनकतीउसका "मेहनतकश" होना याद आता है !!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब घर में देर से आने पररोटियां ठंडी हो जाती है सब्जियों मेंतुम्हारी पसंद का जायका नहीं रहताऔर तुमसे यह कहते नही बनता"मुझे ये पसंद नहीं "!!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब बच्चा रात को ज़ोर से रोता हैआप अनमने से उठ जाते होऔर यह नहीं कह पाते"कितनी लापरवाह हो तुम"!!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब आप रात में अकेले सोते हैंकरवट बदलते रहते हैं बगल मेंपर हाथ धरने पर कुछ नहीं मिलता!!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब त्यौहारों के मौसम मेंनयी चीज़ों के लिए कोई नहीं लड़ताऔर तुमसे ये कहते नही बनता"और पैसे नहीं हैं "!!एक औरत की कमी तब अखरती हैजब आप गम के बोझ तले दबे होते हैं ,निपट अकेले रोते हैं और आपके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं होताआप किसी से कुछ नहीं कह पातेहाँ, औरत की कमी तब अखरती जरूर है!महिलाएं कभी अपने लिए नहीं जीती।। 🙏Author : Unknown,

कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो ; बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफ़ी हो..।

राख तेरी उड़ जायेगीजब चिट्ठी कटेगी ऊपर वाले की तब समय होगा तेरे जाने का । सगे-सम्बन्धी तेरे सब जमा होकर तुझको चम्मच भर गंगाजल पिलायेंगे । आटे पानी का लड्डु रखेंगे सामने तेरे , जब जरूरत नहीं होगी तेरे खाने की । पाँच पच्चीस मिलकर जल्दी करेंगे तुझको ले जाने की , लकड़ी से अभी जला देंगे तुझको और जल्दी करेंगे नहाने की। अस्थि लेकर तेरी चल पड़ेंगे सब और राख तेरी उड़ जायेगी । दो दिन तक शोक मनायेगी दुनिया और उतावली होगी मिष्ठान खाने को। स्वार्थ की सारी है ये दुनिया सब पल भर में भूल जायेगी...।

कभी कभार हमें सही होने के बावजूद भी चुप रहना पड़ता है । इसलिए नहीं कि हम डरते हैं, बल्कि इसलिए कि रिश्ते हमें बहस से ज्यादा प्यारे होते हैं।