Tuesday, 7 March 2023
#दो बूँद #पानी तेरी #बादशाहत !!#बादशाह हारून रशीद के शाही तख्त पर एक फ़कीर आकर बैठ गया नाम बहलोल दाना है , इस जुर्म में उसे बहुत मारा गया !और #बादशाह बोला तुमने इस तख्त पर बैठने की जूर्रत कैसे की फ़कीर बोला एे वक्त के बादशाह मुझको तुझे कुछ बताना मक्सूद था ! मैं दो सवाल करूँगा बस इसका जवाब दे दो ?ए बादशाह ये बता अगर जंगल में तुझे शिद्धत की प्यास लगी हो और पानी बिल्कुल न हो और तेरी जान पर बन आये तो मैं तुझे एक बूंद जीने के लिये पिला दूँ तब क्या इसके बदले तुम अपनी आधी हुकुमत देन्गे , बादशाह बोला हाँ जान बचाने के लिये दे सकता हूँ ! बिना रुके फ़कीर फिर दुसरा सवाल करता है बोला एे बादशाह मुझे बता अगर तुझे पेशाब रुकने की बीमारी हो और एक बार ऐसा हो कि इसकी वजह से तुम्हारी जान निकलने वाली हो और मैं तेरा पेशाब बाहर करने की तदबीर जानता हूँ मेरे अलावा कोई एलाज न कर सके तब इसके बदले तुम आधी हुकुमत दे दोगे ?बादशाह बोला क्यों नहीं जान के बदले मैं ऐसा कर दूँगा !!अब क्या था फ़कीर ज़ोर से हंसा और बोला मैं तेरी हुकुमत तेरी सल्तनत की औकात बताना चाहता था देखा न तेरी पूरी बादशाहत की कीमत बस दो बूंद पानी यही है इस फानी दुनिया की हकीकत !!
... ︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵ ✧ शराफ़त का चोला ✧ ︶︸︶︸︶︸︶︸︶︸︶ एक कबूतर और क़बूतरी पेड़ की डाल पर बैठे थे. उन्हें बहुत दूर से एक आदमी आता दिखाई दिया. कबूतरी के मन में कुछ शंका हुई, औऱ उसने क़बूतर से कहा कि चलो जल्दी उड़ चलें , नहीं तो ये आदमी हमें मार डालेगा. क़बूतर ने लंबी सांस लेते हुए इत्मीनान के साथ क़बूतरी से कहा ~ उसे ग़ौर से देखो तो सही, उसकी अदा देखो, लिबास देखो, चेहरे से शराफत टपक रही है, ये हमें क्या मारेगा. बिल्कुल सज्जन पुरुष लग रहा है. क़बूतर की बात सुनकर क़बूतरी चुप हो गई. जब वह आदमी उनके क़रीब आया, तो अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला औऱ झट से क़बूतर को तीर मार दिया. औऱ बेचारे उस क़बूतर के वहीं प्राण पखेरू उड़ गए.असहाय क़बूतरी ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई औऱ बिलखने लगी. उसके दुःख का कोई ठिकाना न रहा औऱ पल भर में ही उसका सारा संसार उजड़ गया. उसके बाद वह क़बूतरी रोती हुई अपनी फरियाद लेकर राजा के पास गई औऱ राजा को उसने पूरी घटना बताई. राजा बहुत दयालु इंसान था. राजा ने तुरंत अपने सैनिकों को उस शिकारी को पकड़कर लाने का आदेश दिया. तुरंत शिकारी को पकड़ कर दरबार में लाया गया. शिकारी ने डर के कारण अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उसके बाद राजा ने क़बूतरी को ही उस शिकारी को सज़ा देने का अधिकार दे दिया औऱ उससे कहा कि तुम जो भी सज़ा इस शिकारी को देना चाहो , दे सकती हो औऱ तुरंत उस पर अमल किया जाएगा.★ क़बूतरी ने बहुत दुःखी मन से कहा कि हे राजन, मेरा जीवन साथी तो इस दुनिया से चला गया, जो फ़िर क़भी भी लौटकर नहीं आएगा, इसलिए मेरे विचार से इस क्रूर शिकारी को बस इतनी ही सज़ा दी जानी चाहिए , कि अगर वो शिकारी है, तो उसेहर वक़्त शिकारी का ही लिबास पहनना चाहिए. ये शराफत का लिबास वह उतार दे, ❗ क्योंकि ❗ शराफ़त का लिबास ओढ़कर धोखे से घिनौने कर्म करने वाले सबसे बड़े नीच होते हैं. आप भी अपने आसपास शराफ़त का ढोंग करने वाले बहुरूपियों से हमेशा सावधान रहें , सतर्क रहें औऱ अपना बहुत ख़याल रखें. #story #kabootar #pigeon
Saturday, 4 March 2023
Friday, 3 March 2023
जरा ध्यान से पढ़ें जीवन की यही सच्चाई है 🙏🙏🙏*मत परेशान हो, क्योंकि आमतौर पर...* *1. चालीस साल की अवस्था में* "उच्च शिक्षित" और "अल्प शिक्षित" एक जैसे ही होते हैं। (क्योंकि अब कहीं इंटरव्यू नहीं देना, डिग्री नहीं दिखानी).*2. पचास साल की अवस्था में* "रूप" और "कुरूप" एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते).*3. साठ साल की अवस्था में* "उच्च पद" और "निम्न पद" एक जैसे ही होते हैं। (चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है).*4. सत्तर साल की अवस्था में* "बड़ा घर" और "छोटा घर" एक जैसे ही होते हैं। (बीमारियाँ और खालीपन आपको एक जगह बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, और आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं).*5. अस्सी साल की अवस्था में* आपके पास धन का "कम होना" या "ज्यादा होना" एक जैसे ही होते हैं। (अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है).*6. नब्बे साल की अवस्था में* "सोना" और "जागना" एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें.*आगे चल कर एक दिन सब की यही स्थिति होनी है, यही जीवन की सच्चाई है...*चैन से जीने के लिए चार रोटी और दो कपड़े काफ़ी हैं... पर ,बेचैनी से जीने के लिए चार गाड़ी, दो बंगले और तीन प्लॉट भी कम हैं !!*जीवन की सच्चाई!*🙏🙏🙏🙏🙏🙏#zindagi #jeevankisachai #beautifullife
Thursday, 2 March 2023
...💐 ︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵ 💐 ✧ ~ भाँति-भाँति के लोग ~ ✧ ︶︸︶︸︶︸︶︸︶︸︶ जिस तरह हम सबके हालात और समस्याओं के आकार-प्रकार एक दूजे से अलग होते हैं, वैसे ही हम सभी इंसानों की सोच काम करने की शैली व समस्या से निपटने की क्षमता भी एक दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं. सोच व शैली के अनुसार इंसानों को 3 श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं.1- कर्मठ इंसान --> जो अपने दम पर जीवन को चलाने की क्षमता रखते हैं, अनचाहे हालात को बदलने के लिए, दृढ़तापूर्वक संघर्ष-रथ पर सवार रहते, हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं. पूरे जोश और जुनून से अपना शत-प्रतिशत देकर, मनचाहे परिणाम पाकर 'मनमर्जी का जीवन' जीते हैं.2- सरल व संतुष्ट इंसान --> जो भले-बुरे कैसे भी हालात हों, उनमें खुश रह लेते हैं. इन्हें ज्यादा की चाह नहीं, इनकी इच्छाएं सीमित रहती, जो ईश्वर ने दिया, उसे प्रसाद समझकर, जो भी..जैसा भी..मिला उसमें खुश व मस्त रहते हैं. 'कंफर्टेबल ज़ोन' (आरामदायक स्थिति) में रहना उनको अधिक भाता है. नया करने से कतराते हैं. खुद में मगन , दोषारोपण और शिकवे-शिकायतों से दूर रहकर 'खुशी से जीवन जीते' हैं.3- नाखुश इंसान --> जिनकी इच्छाएं बहुत ज्यादा होती हैं. दूसरों की संपन्नता देख खुद हीनभावना से ग्रस्त हो जाते, तुलना के तराजू पर अक्सर बैठ जाते हैं , इसलिए असंतोष से भरे रहते हैं. इनकी इच्छाओं का घड़ा कभी नहीं भरता. चाहते तो बहुत कुछ हैं , लेकिन टालू प्रवृत्ति के कारण मेहनत करने से कतराते हैं. इन्हें खुद से ,अपनी किस्मत से, ईश्वर से व दुनिया से ,यानी सभी से बहुत शिकायतें होती हैं. जबकि सच यह है कि ... सिर्फ़ सोचने मात्र से कभी स्वप्न साकार नहीं होते. कोशिश करके , दृढ़ता से प्रयास करके ही जीवन में बेहतर परिणाम मिलते है.★ अब हमें तय करना है कि हम किस श्रेणी में आते हैं ? अपने स्वभाव को पहचानिए. अपने हालत व सोच के अनुसार अपनी उपस्थिति को महसूस कीजिए. अगर बदलाव की जरूरत है तो मनचाही दिशा में चलकर भी देख लीजिए.#BeautifulLife #hindisuvichar
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