Monday, 28 February 2022

शिव जैसा ध्यानी नहीं है जय शम्भूध्यानी हो तो शिव जैसा हो। क्या अर्थ है ? ध्यान का अर्थ होता है : न विचार...न वासना... न स्मृति... न कल्पना ? ध्यान का अर्थ होता है: भीतर सिर्फ होना मात्र । इसीलिए शिव को मृत्यु का, विध्वंस का विनाश का देवता कहा है । क्योंकि ध्यान विध्वंस है- विध्वंस है मन का मन ही संसार है। मन ही सृजन है । मन ही सृष्टि है। मन गया कि प्रलय हो गयी। ऐसा मत सोचो कि किसी दिन प्रलय होती है। ऐसा मत सोचो कि एक दिन आयेगा जब प्रलय हो जायेगी और सब विध्वंस हो जायेगा। नहीं, जो भी ध्यान में उतरता है, उसकी प्रलय हो जाती है। जो भी ध्यान में उतरता है, उसके भीतर शिव का पदार्पण हो जाता है । ध्यान है मृत्यु - मन की मृत्यु, 'मैं' की मृत्यु, विचार का अंत । शुद्ध चैतन्य रह जाये दर्पण जैसा खाली! कोई प्रतिबिम्ब न बने....!! (ओशो)

स्मरण रहे "सत्य ही सब कुछ है.. जो, सत्य के साथ हैं उसके साथ स्वयं त्रिलोकी नाथ है।#happymahashivratri #omnamahshivay

एक बार एक पिता ने अपनी बेटी की सगाई करवाई ।लड़का बड़े अच्छे घर से था , इसलिए माता पिता दोनों बहुत खुश थे ।लड़के के साथ लड़के के पूरे परिवार का स्वभाव भीबड़ा अच्छा था !पिता को अपनी बेटी की शादी अच्छे घर में पक्का होने पर राहत भी महसूस हो रहा था ।शादी से एक सप्ताह पहले लड़के वालों ने लड़की के पिता को अपने घर खाने पर बुलाया....!उस लड़की के पिता की तबीयत ठीक नहीं थी फिर भी वे ना न कह सके!लड़के वालों ने बड़े ही आदर सत्कार से उनका स्वागत किया ।फ़िर लडकी के पिता के लिए चाय आई ।लेकिन शुगर की वजह से लडकी के पिता को चीनी वाली चाय से दूर रहने के लिए कहा गया था ।पिता अपनी लड़की के होने वाली ससुराल में थे , इसलिए उन्होंने बिलकुल चुप रह कर चाय अपने हाथ में ले ली ।चाय कि पहली चुस्की लेते ही वो चौक से गये ! चाय में चीनी बिल्कुल ही नहीं थी और इलायची भी डली हुई थी!वो सोच मे पड़ गये कि ये लोग भी हमारी जैसी ही चाय पीते हैं शायद ।जब दोपहर में उन्होंने खाना खाया , वो भी बिल्कुल उनके घर जैसा । उसके बाद दोपहर में आराम करने के लिए दो तकिये , पतली चादर मौजूद थे । उठते ही उन्हें निम्बू पानी का शर्बत दिया गया ।वहाँ से विदा लेते समय उनसे रहा नहीं गया तो वे हैरानी वश पूछ बैठे.....श्रीमान जी, मुझे क्या खाना है , क्या पीना है , मेरी सेहत के लिए क्या अच्छा है या डॉक्टरों ने मेरे लिए क्या वर्जित किया है , ये परफेक्टली आपको कैसे पता है ??पिता की पूरी बात सुनने के बाद बेटी कि सास ने धीरे से कहा कि कल रात को ही आपकी बेटी का फ़ोन आ गया था औऱ उसने बेहद विनम्रता से कहा था कि मेरे पापा स्वभाव से बड़े सरल हैं , बोलेंगे कुछ नहीं लेकिन प्लीज अगर हो सके तो आप उनका ध्यान रखियेगा !पूरी बात सुनकर पिता की आंखों में पानी भर आया....!लड़की के पिता जब अपने घर पहुँचे तो घर के ड्राइंग रूम में लगी अपनी स्वर्गवासी माँ के फोटो से हार निकाल दिया ।जब पत्नी ने उनसे पूछा कि ये क्या कर रहे हो तो लडकी के पिता बोले-मेरा आजीवन ध्यान रखने वाली मेरी माँ इस घर से कहीं नहीं गयी है , बल्कि वो तो मेरी बेटी के रुप में इस घर में ही रहती है!और फिर पिता की आंखों से आंसू छलक गये ओर वो फफक कर रो पड़े...साथ में माँ भी रोने लगी ।दुनिया में सब कहते हैं ना कि बेटी है , एक दिन इस घर को छोड़कर चली जायेगी लेकिन बेटियां कभी भी अपने माँ-बाप के घर से नहीं जाती, बल्कि वो हमेशा उनके दिल में रहती हैं ।

*100 टके की बात**"मिडिल-क्लास"* का होना भी किसी वरदान से कम नहीं है कभी बोरियत नहीं होती।जिंदगी भर कुछ ना कुछ आफ़त लगी ही रहती है। मिडिल क्लास वालों की स्थिति सबसे दयनीय होती है, न इन्हें तैमूर जैसा बचपन नसीब होता है न अनूप जलोटा जैसा बुढ़ापा, फिर भी अपने आप में उलझते हुए व्यस्त रहते है । मिडिल क्लास होने का भी अपना फायदा है चाहे BMW का भाव बढ़े या AUDI का या फिर नया i phone लांच हो जाऐ, घंटा फर्क नही पङता। मिडिल क्लास लोगों की आधी ज़िंदगी तो झड़ते हुए बाल और बढ़ते हुए पेट को रोकने में ही चली जाती है। इन घरों में पनीर की सब्जी तभी बनती है जब दुध गलती से फट जाता है और मिक्स-वेज की सब्ज़ी भी तभी बनती हैं जब रात वाली सब्जी बच जाती है।इनके यहाँ फ्रूटी, कॉल्ड ड्रिंक एक साथ तभी आते है जब घर में कोई बढ़िया वाला रिश्तेदार आ रहा होता है। मिडिल क्लास वालों के कपड़ों की तरह खाने वाले चावल की भी तीन वेराईटी होती है; डेली,कैजुवल और पार्टी वाला। छानते समय चायपत्ती को दबा कर लास्ट बून्द तक निचोड़ लेना ही मिडिल क्लास वालों के लिए परमसुख की अनुभुति होती है। ये लोग रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल नही करते, सीधे अगरबत्ती जला लेते है। मिडिल क्लास भारतीय परिवार के घरों में Get- together नहीं होता, यहां *'सत्यनारायण भगवान की कथा'* होती है। इनका फैमिली बजट इतना सटीक होता है कि सैलरी अगर 31के बजाय 1 को आये तो गुल्लक फोड़ना पड़ जाता है। मिडिल क्लास लोगों की आधी ज़िन्दगी तो "बहुत महँगा है" बोलने में ही निकल जाती है। इनकी *"भूख"* भी होटल के रेट्स पर डिपेंड करती है, दरअसल महंगें होटलों की मेन्यू-बुक में मिडिल क्लास इंसान 'फूड-आइटम्स' नहीं बल्कि अपनी "औकात" ढूंढ रहा होता है। इश्क़ मोहब्बत तो अमीरों के चोचलें है, मिडिल क्लास वाले तो सीधे "ब्याह" करते हैं। इनके जीवन में कोई वैलेंटाइन नहीं होता। *"जिम्मेदारियां"* ज़िंदगी भर बजरंग-दल सी पीछे लगी रहती हैं। मध्यम वर्गीय दूल्हा- दुल्हन भी मंच पर ऐसे बैठे रहते हैं मानो जैसे किसी भारी सदमे में हो। अमीर शादी के बाद हनीमून पे चले जाते है और मिडिल क्लास लोगो की शादी के बाद टेंन्ट- बर्तन वाले ही इनके पीछे पड़ जाते है। मिडिल क्लास बंदे को पर्सनल बेड और रूम भी शादी के बाद ही अलाॅट हो पाता है। मिडिल क्लास बस ये समझ लो कि जो तेल सर पे लगाते है वही तेल मुंह में भी रगड़ लेते है। एक सच्चा मिडिल क्लास आदमी गीजर बंद करके तब तक नहाता रहता है जब तक कि नल से ठंडा पानी आना शुरू ना हो जाए। रूम ठंडा होते ही AC बंद करने वाला मिडिल क्लास आदमी चंदा देने के वक्त नास्तिक हो जाता है और प्रसाद खाने के वक्त आस्तिक। दरअसल मिडिल-क्लास तो चौराहे पर लगी घण्टी के समान है, जिसे लूली-लगंड़ी, अंधी-बहरी, अल्पमत-पूर्णमत हर प्रकार की सरकार पूरा दम से बजाती है। मिडिल क्लास को आज तक बजट में वही मिला हैं जो अक्सर हम मंदिर में बजाते हैं। फिर भी हिम्मत करके मिडिल क्लास आदमी की पैसा बचाने की बहुत कोशिश करता हैं लेकिन बचा कुछ भी नहीं पाता। हक़ीक़त में मिडिल मैन की हालत पंगत के बीच बैठे हुए उस आदमी की तरह होती है जिसके पास पूड़ी-सब्जी चाहे इधर से आये, चाहे उधर से, उस तक आते-आते खत्म हो जाती है। मिडिल क्लास के सपने भी लिमिटेड होते है "टंकी भर गई है, मोटर बंद करना है, गैस पर दूध उबल गया है, चावल जल गया है" इसी टाईप के सपने आते है।...✍🏻

समझ लीजिए ये बातें• डॉक्टर तुम्हें सेहतमंद नही बना सकता।कोई फिटनेस ट्रेनर तुम्हें पतला नही कर सकता।कोई टीचर तुम्हें इंटेलिजेंट नहीं बना सकता।• कोई गुरु तुम्हें कामयाबी नहीं दिला सकता।कोई भी अमीर तुम्हें अमीर नही बना सकता।• कोई कोच तुम्हारी बॉडी नहीं बना सकता।सब सलाह दे सकते हैं मेहनत खुद करनी होगी।